गृहलक्ष्मी

Housewife

 

 

उद्यम से स्वादविहीन
आखिरी रोटी खाती है
उसकी रसोई के विश्लेषण
में कहे सब कड़वे शब्द
चिपके हैं तालू से

सुन्दर, महंगी साड़ी
उसने बचा रखी है
किसी विशेष अवसर के लिए
जब कि मर चुके हैं
उसके देह के सारे त्यौहार
तुम्हारे बिस्तर में

बच्चों की ख्वाहिशों
का हिसाब लगाती
मुल्तवी कर चुकी है
वो अपने सारे अल्हड़पन
तुम्हारे असम्वेदन को
रोज़ सींचती गूंगे आंसुओं से

तुम्हारी देवी, प्रिया
गृहलक्ष्मी

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